भक्ति व शक्ति का केंद्र माँ जगदम्बाधाम

जानकारी




श्री राधेन्द्र नागेश्वर पाण्डेय

शहर में विविध धार्मिक स्थान है. जहाँ श्रद्धालु विधिविधान से भगवान की पूजा अर्चना करते है. बोखारा कोराडी रोड स्थित मां जगदम्बाधाम भी इनमे से एक है. विशाल भूभाग में इस मंदिर की भव्यता देखतेही बनती है. स्थानीय निवासी चंद्रभान यादव ने मंदिर के लिए जमीन मुहैय्या कराई थी. शहर की भीड़भाड़ से दूर बोखारा ग्राम में बने इस मंदिर के सम्बन्ध में अनेक किंवदंतियां हैं.

मां जगदम्बा के इस विशाल मंदिर में वर्तमान में अनेक देवी देवताओंकी प्रतिमाएँ विराजमान हैं. करीब ३ एकड़ में बने इस मंदिर में प्रतिवर्ष कुछ न कुछ आयोजन चलते रहते हैं. जहां श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाते हैं. मंदिर के पुजारी एवं संस्थापक पं. राजेन्द्र पांडेय ने बताया कि १९९४ में मां जगदम्बा की छोटी सी प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी. पुलिस से सेवानिवृत्त पांडेय जो की पूरी तरह से मंदिर की सेवा में तत्पर हैं, ने बताया वर्तमान में जनसहयोग से मंदिर में धार्मिक गतिविधियां लगातार जारी हैं.

यहां न केवल महाराष्ट्र बल्कि मप्र, छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों से भक्त मां के चरणों में नमन करने आते हैं. सुबह से ही भक्तोंके आने क्रम प्रारम्भ हो जाता हैं. देर रात तक यह क्रम चलता रहता हैं. इस भव्य मंदिर के बनने से यहां जंगल में मंगल कहावत पूरी तरह से चरितार्थ हो रही हैं. सुबह से ही माता के जयकारे गूंजने लगते हैं.


स्कुल व् अस्पताल भी प्रस्तावित



मंदिर को सामाजिक गतिविधियों को जोड़ने के उद्देश्य से यहां गरीब बच्चों के लिए स्कुल एवं धर्मार्थ अस्पताल भी प्रस्तावित हैं. आचार्य पांडेय ने बताया की इस सम्बन्ध में प्रयास जारी हैं. जल्द ही जनसहयोग से यह कार्य शुरू होंगे, साथ ही निराधार एवं बेसहारा लोगों के पालन-पोषण के लिए योजना शुरू की जाएगी.

मंदिर से जुड़े सभी प्रकार के कार्यों में त्रिलोकिलाथ सिधरा, रामसंभार त्रिपाठी, साईं प्रिया बंसल, दिनेश पुरोहित, पवन शर्मा, नितिन पांडेय, कल्लू दुबे, शंकर कनौजिया, नन्दकिशोर विश्वकर्मा, जितेंद्र शर्मा, पवन शर्मा, मधुसुधन आगुटले, धनराज उज्जैनकर आदि का निरन्तर सहयोग मिल रहा हैं.


नवरात्री में उमड़ता है जनसैलाब



शहर में विविध धार्मिक स्थान है. जहाँ श्रद्धालु विधिविधान से भगवान की पूजा अर्चना करते है. बोखारा कोराडी रोड स्थित मां जगदम्बाधाम भी इनमे से एक है. विशाल भूभाग में इस मंदिर की भव्यता देखतेही बनती है. स्थानीय निवासी चंद्रभान यादव ने मंदिर के लिए जमीन मुहैय्या कराई थी. शहर की भीड़भाड़ से दूर बोखारा ग्राम में बने इस मंदिर के सम्बन्ध में अनेक किंवदंतियां हैं.

मां जगदम्बा के इस विशाल मंदिर में वर्तमान में अनेक देवी देवताओंकी प्रतिमाएँ विराजमान हैं. करीब ३ एकड़ में बने इस मंदिर में प्रतिवर्ष कुछ न कुछ आयोजन चलते रहते हैं. जहां श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाते हैं. मंदिर के पुजारी एवं संस्थापक पं. राजेन्द्र पांडेय ने बताया कि १९९४ में मां जगदम्बा की छोटी सी प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी. पुलिस से सेवानिवृत्त पांडेय जो की पूरी तरह से मंदिर की सेवा में तत्पर हैं, ने बताया वर्तमान में जनसहयोग से मंदिर में धार्मिक गतिविधियां लगातार जारी हैं.

यहां न केवल महाराष्ट्र बल्कि मप्र, छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों से भक्त मां के चरणों में नमन करने आते हैं. सुबह से ही भक्तोंके आने क्रम प्रारम्भ हो जाता हैं. देर रात तक यह क्रम चलता रहता हैं. इस भव्य मंदिर के बनने से यहां जंगल में मंगल कहावत पूरी तरह से चरितार्थ हो रही हैं. सुबह से ही माता के जयकारे गूंजने लगते हैं.



माँ जगदम्बाधाम


विशालकाय हनुमान प्रतिमा


मंदिर में प्रवेश करने पर सामने विशालकाय हनुमानजी की प्रतिमा दिखाई देतो है जो अनायास ही भक्तों का ध्यान अपनी और खिंच लेती है. पवनपुत्र बजरंग बलि की इस प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालु नतमस्तक होते है. मंदिर परिसर में सबसे बड़ी मूर्ति बजरंग बली की है.

माँ जगदम्बामाता


शहर की भीड़भाड़ से दूर बोखारा ग्राम में बने इस मंदिर के सम्बन्ध में अनेक किंवदंतियां हैं. मां जगदम्बा के इस विशाल मंदिर में वर्तमान में अनेक देवी देवताओंकी प्रतिमाएँ विराजमान हैं. करीब ३ एकड़ में बने इस मंदिर में प्रतिवर्ष कुछ न कुछ आयोजन चलते रहते हैं. जहां श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाते हैं.